चुनाव आयोग ने आंतरिक प्रक्रिया और चुनावी सुधारों पर दी सफाई
delhi
9:47 PM, Sep 24, 2026
आयोग के अनुसार, लिखित टिप्पणियां, सुझाव, तकनीकी राय और आंतरिक जांच-पड़ताल उसकी नियमित कार्यप्रणाली का हिस्सा हैं। आयोग द्वारा जारी सभी आदेश और प्रशासनिक निर्देश निर्धारित वैधानिक प्रक्रियाओं के अनुरूप


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नई दिल्ली । भारत निर्वाचन आयोग ने 23 सितंबर 2026 को जारी प्रेस विज्ञप्ति में आयोग की आंतरिक कार्यप्रणाली, निर्णय प्रक्रिया और हाल में किए गए चुनावी सुधारों को लेकर स्थिति स्पष्ट की है। आयोग ने कहा कि वह संविधान के अनुच्छेद 324, वैधानिक नियमों और स्थापित संस्थागत प्रक्रियाओं के तहत कार्य करता है।
आयोग के अनुसार, लिखित टिप्पणियां, सुझाव, तकनीकी राय और आंतरिक जांच-पड़ताल उसकी नियमित कार्यप्रणाली का हिस्सा हैं। आयोग द्वारा जारी सभी आदेश और प्रशासनिक निर्देश निर्धारित वैधानिक प्रक्रियाओं के अनुरूप होते हैं।
प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि मसौदा स्तर पर आयोग के सदस्यों की ओर से उठाए गए सवाल और सुझाव मतदाता अधिकारों की सुरक्षा तथा चुनावी प्रक्रिया को बेहतर बनाने के उद्देश्य से होते हैं। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि अलग-अलग राय और टिप्पणियां किसी भी संस्थान की निर्णय प्रक्रिया का सामान्य हिस्सा हैं और अंतिम निर्णय से पहले सभी अधिकारी अपने सुझाव दे सकते हैं।
आयोग ने कहा कि पिछले 10 महीनों की कुछ आंतरिक टिप्पणियों को अलग-अलग देखने से पूरी तस्वीर सामने नहीं आती। पिछले एक वर्ष में आयोग ने कई महत्वपूर्ण निर्णय और निर्देश जारी किए तथा करीब 40 नई पहल शुरू कीं। इनमें देशभर में मतदाता सूची के पुनरीक्षण सहित एसआईआर (SIR) जैसी प्रक्रियाएं भी शामिल हैं। आयोग ने दावा किया कि ये सभी निर्णय पूरे आयोग की सर्वसम्मत निर्णय प्रक्रिया का परिणाम रहे हैं।
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प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक, आयोग ने हाल में बिहार, केरल, तमिलनाडु, पुडुचेरी, असम और पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव सफलतापूर्वक संपन्न कराए। इस दौरान व्यापक प्रशासनिक और चुनावी मशीनरी के साथ अनेक स्वीकृतियां और निर्देश जारी किए गए।
आयोग ने अपने डिजिटल प्लेटफॉर्म ECINet की सुरक्षा को लेकर भी कहा कि इन्हें कड़े डेटा सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत संचालित किया जाता है। अनधिकृत छेड़छाड़ और डेटा में बदलाव रोकने के लिए आईटी सुरक्षा जांच और ऑडिट की व्यवस्था लागू है। निर्वाचन पंजीकरण अधिकारियों (ERO) और जिला निर्वाचन अधिकारियों (DEO) को कानून के तहत मतदाता पंजीकरण और नाम हटाने संबंधी वैधानिक अधिकार प्राप्त हैं।
अंत में निर्वाचन आयोग ने कहा कि वह लोकतंत्र को मजबूत करने में अपनी संवैधानिक भूमिका को ध्यान में रखते हुए पूरी निष्ठा और पारदर्शिता के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करने के लिए प्रतिबद्ध है।