शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और उनके शिष्य स्वामी मुकुंदानंद गिरी के खिलाफ दर्ज होगी एफआईआर, कोर्ट ने दिया आदेश
prayagraj
12:36 AM, Feb 22, 2026
प्रयागराज की विशेष POCSO अदालत ने शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और उनके शिष्य स्वामी मुकुंदानंद गिरी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया है।


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प्रयागराज की विशेष POCSO अदालत ने शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और उनके शिष्य स्वामी मुकुंदानंद गिरी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया है। एडीजे (POCSO एक्ट) ने शनिवार को उत्तर प्रदेश पुलिस को मामले की पूरी जांच करने का निर्देश भी दिया है। शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पर नाबालिक बच्चों के साथ यौन शोषण का आरोप है। कोर्ट के इस आदेश के बाद शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने अपने उपर लगे सभी आरोपों को झूठा बतलाया है।
पोक्सो कोर्ट के इस आदेश के बाद अब झूंसी थाना पुलिस स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और उनके शिष्य स्वामी मुकुंदानंद गिरी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर विवेचना शुरू करेगी।
दरअसल शाकुंभरी पीठाधीश्वर आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और उनके शिष्य स्वामी मुकुंदानंद गिरी के खिलाफ नाबालिग बच्चों के यौन उत्पीड़न के आरोप में झूंसी थाने में मुकदमा दर्ज करने के लिए तहरीर दी थी लेकिन पुलिस द्वारा मुकदमा न दर्ज किए जाने पर 28 जनवरी को बीएनएसएस 173 (4) के तहत एफआईआर दर्ज करवाने के लिए प्रयागराज जिला अदालत में अर्जी दाखिल की थी । वादी आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज ने कोर्ट से एफआईआर दर्ज कर सख्त कार्रवाई किए जाने की मांग की थी। इस मामले में एडीजे पोक्सो कोर्ट में 13 फरवरी को सुनवाई हुई थी। अदालत में आरोप लगाने वाले दोनों नाबालिगों का वीडियोग्राफी के साथ बयान भी दर्ज हुआ था। इसके साथ ही अदालत ने पुलिस की रिपोर्ट को भी संज्ञान में ले लिया था। बयान दर्ज करने और पुलिस रिपोर्ट संज्ञान में लेने के बाद कोर्ट ने जजमेंट रिजर्व कर लिया था और शनिवार को प्रयागराज की पॉक्सो कोर्ट ने अपना फैसला सुनाया है।
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स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने आरोपों पर जवाब दिया है। उन्होंने कहा कि ये आरोप फर्जी है । सच्चाई सामने आ जाएगी। अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि मेरे खिलाफ फर्जी मुकदमा दायर किया गया था। उन्होंने कहा कि न्यायालय लंबा समय न लगाए, जल्द से जल्द इस पर कार्यवाही शुरू करे। उन्होंने कहा कि आरोप लगाने वाला खुद हिस्ट्रीशीटर है, उसका नाम कई जगह दर्ज है।