Sonbhadra News : 'अफसरशाही एनीमिया' का शिकार स्वास्थ्य महकमा, सीमित अफसरों के भरोसे चल रही करोड़ों की हेल्थ स्कीम
sonbhadra
2:30 PM, Jun 9, 2026
आदिवासी बाहुल्य एवं प्रधानमंत्री की महत्वाकांक्षी योजनाओं के केंद्र में रहने वाले अति पिछड़े जनपद सोनभद्र की स्वास्थ्य व्यवस्था इन दिनों गंभीर "अफसरशाही एनीमिया" की शिकार दिखाई दे रही है। जिले में....


सीएमओ रमेश कुमार मिश्रा......
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आनन्द कुमार चौबे (संवाददाता)
सोनभद्र । आदिवासी बाहुल्य एवं प्रधानमंत्री की महत्वाकांक्षी योजनाओं के केंद्र में रहने वाले अति पिछड़े जनपद सोनभद्र की स्वास्थ्य व्यवस्था इन दिनों गंभीर "अफसरशाही एनीमिया" की शिकार दिखाई दे रही है। जिले में मरीजों के इलाज से लेकर स्वास्थ्य योजनाओं की निगरानी तक की जिम्मेदारी संभालने वाला स्वास्थ्य विभाग खुद अधिकारियों की भारी कमी से जूझ रहा है। हालात ऐसे हैं कि विभाग के पास योजनाएं तो ढेर हैं, लेकिन उन्हें जमीन पर उतारने के लिए पर्याप्त अधिकारी नहीं हैं।
स्वास्थ्य विभाग के उपलब्ध आंकड़े बताते हैं कि जिले में अपर मुख्य चिकित्साधिकारी (एसीएमओ) के 9 स्वीकृत पदों के सापेक्ष मात्र 3 अधिकारी ही तैनात हैं। चिंताजनक बात यह है कि इनमें से भी दो अधिकारी आगामी मार्च माह तक सेवानिवृत्त हो जाएंगे। यदि समय रहते रिक्त पदों पर नियुक्तियां नहीं हुईं तो जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था और अधिक संकट में फंस सकती है।वहीं डिप्टी सीएमओ के 7 स्वीकृत पदों के मुकाबले केवल 5 अधिकारी ही कार्यरत हैं। नतीजा यह है कि एक-एक अधिकारी के कंधों पर कई-कई राष्ट्रीय एवं राज्य स्तरीय योजनाओं का अतिरिक्त बोझ है। टीकाकरण, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, परिवार कल्याण, संचारी रोग नियंत्रण, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, अस्पतालों की निगरानी तथा अन्य कार्यक्रमों का प्रभार सीमित अधिकारियों के भरोसे चल रहा है।
एक अफसर, कई कुर्सियाँ -
सूत्रों की मानें तो कई अधिकारियों के पास दो से तीन महत्वपूर्ण योजनाओं का अतिरिक्त प्रभार है। ऐसे में न तो योजनाओं की प्रभावी मॉनिटरिंग हो पा रही है और न ही जमीनी स्तर पर नियमित समीक्षा। विभागीय बैठकों से लेकर निरीक्षण और शासन को रिपोर्टिंग तक का काम सीमित अधिकारियों के भरोसे चल रहा है।
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि अधिकारी कम होने का सीधा असर योजनाओं के क्रियान्वयन पर पड़ता है। कई बार फील्ड निरीक्षण प्रभावित होते हैं, अस्पतालों की निगरानी कमजोर पड़ती है और शिकायतों के निस्तारण में भी देरी होती है।
सवालों के घेरे में शासन की प्राथमिकता -
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सरकार लगातार ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने का दावा करती रही है। सोनभद्र जैसे संवेदनशील जिले को विशेष प्राथमिकता दिए जाने की बात भी कही जाती है, लेकिन अधिकारियों की भारी कमी इन दावों पर सवाल खड़े कर रही है। यदि स्वास्थ्य विभाग में ही पर्याप्त नेतृत्व उपलब्ध नहीं होगा तो योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक कैसे पहुंचेगा, यह बड़ा प्रश्न बन गया है।