Sonbhadra News : बकाया भुगतान और अवैध वसूली रोकने समेत 9 सूत्रीय मांगों को लेकर आशाओं ने किया प्रदर्शन
sonbhadra
12:47 PM, May 20, 2026
उत्तर प्रदेश आशा वर्कर्स यूनियन ने सरकार पर समझौते के बावजूद मांगों को लंबित रखने का आरोप लगाते हुए गहरा आक्रोश जताया है। यूनियन पदाधिकारियों ने कहा कि 6 फरवरी 2026 को प्रदेश के उपमुख्यमंत्री......


AI जनरेटेड बैनर......
Share:
आनन्द कुमार चौबे (संवाददाता)
• वार्ता के 60 दिन बाद भी समाधान नहीं होने से आशा वर्कर्स में बढ़ा आक्रोश
• मांगें नहीं माने जाने पर दी पुनः पूर्ण कार्य की चेतावनी
सोनभद्र । उत्तर प्रदेश आशा वर्कर्स यूनियन ने सरकार पर समझौते के बावजूद मांगों को लंबित रखने का आरोप लगाते हुए गहरा आक्रोश जताया है। यूनियन पदाधिकारियों ने कहा कि 6 फरवरी 2026 को प्रदेश के उपमुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री के साथ हुई वार्ता में 13 सूत्रीय मांग पत्र पर सहमति बनी थी तथा कई मांगों को पूरा करने का लिखित आश्वासन भी दिया गया था, लेकिन 60 दिन से अधिक समय बीत जाने के बाद भी दूसरे चरण की वार्ता तक नहीं बुलाई गई।
संगठन की अध्यक्ष बबिता देवी ने बताया कि "15 दिसंबर 2025 से चल रहे आंदोलन के दौरान स्वास्थ्य मंत्री की मध्यस्थता में अपर मुख्य सचिव स्वास्थ्य की अध्यक्षता में एक कमेटी गठित की गई थी। 9 फरवरी 2026 को बैठक भी हुई, लेकिन उसके बाद से सरकार की ओर से कोई ठोस पहल नहीं की गई। आशा कार्यकर्ताओं का आरोप है कि राज्य वित्त से मिलने वाली 1500 रुपये की राशि को बढ़ाकर 6000 रुपये करने, मातृत्व अवकाश, साप्ताहिक एवं राष्ट्रीय अवकाश, स्वास्थ्य बीमा और जीवन बीमा राशि बढ़ाने जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर सहमति के बावजूद आज तक अमल नहीं हुआ।
विज्ञापन
संगठन सचिव जानकी देवी ने बताया कि "वर्षों से विभिन्न स्वास्थ्य अभियानों में योगदान देने के बावजूद आशा कार्यकर्ताओं को उनका पारिश्रमिक और प्रोत्साहन राशि नहीं मिल रही है। आयुष्मान गोल्डन कार्ड बनाने के कार्य में वर्ष 2018 से लगे आशा कर्मियों को अब तक एक रुपये का भी भुगतान नहीं हुआ। वहीं जुलाई 2019 से दिसंबर 2021 तक राज्य वित्त से घोषित 750 रुपये मासिक की 28 माह की प्रोत्साहन राशि भी लंबित है। कोविड-19 काल में केंद्र सरकार द्वारा घोषित प्रति माह 1000 रुपये की राशि का भी अधिकांश भुगतान नहीं किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि कुष्ठ रोग, टीबी, दस्तक एवं संचारी रोग अभियान समेत कई कार्यक्रमों में लगातार काम लेने के बावजूद भुगतान नहीं किया गया। आभा आईडी निर्माण कार्य में 1 जनवरी 2023 से योगदान लिया गया, लेकिन भुगतान के समय केवल वर्ष 2024 का आंशिक भुगतान कर दिया गया। यूनियन ने इसे आशा कार्यकर्ताओं के साथ अन्याय बताया। उन्होंने कहा कि 4 फरवरी 2026 को 1090 करोड़ रुपये का आवंटन वर्ष 2024-25 की लंबित प्रोत्साहन राशियों के भुगतान हेतु जारी किया गया था, लेकिन अधिकांश आशा कर्मियों को अब तक धनराशि नहीं मिली। जहां भुगतान हुआ भी है, वहां भारी अनियमितताओं और अवैध वसूली की शिकायतें सामने आई हैं।"