Sonbhadra News : सील तोड़ी, ताला तोड़ा और फिर शुरू कर दिया इलाज, स्वास्थ्य विभाग को बेखौफ हॉस्पिटल माफियाओं ने दी खुली चुनौती
sonbhadra
7:10 AM, Aug 11, 2026
निजी अस्पतालों में लगातार सामने आ रही मौतों के बाद स्वास्थ्य विभाग ने जब कार्यवाही का चाबुक चलाया तो अवैध और मानकों को दरकिनार कर संचालित अस्पतालों में हड़कंप मच गया। रॉबर्ट्सगंज, घोरावल, चोपन.......


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आनन्द कुमार चौबे (संवाददाता)
सोनभद्र । निजी अस्पतालों में लगातार सामने आ रही मौतों के बाद स्वास्थ्य विभाग ने जब कार्यवाही का चाबुक चलाया तो अवैध और मानकों को दरकिनार कर संचालित अस्पतालों में हड़कंप मच गया। रॉबर्ट्सगंज, घोरावल, चोपन और दुद्धी क्षेत्र में स्वास्थ्य विभाग की टीमों ने ताबड़तोड़ छापेमारी कर एक दर्जन से अधिक निजी अस्पतालों पर ताले जड़ दिए, कई ऑपरेशन थिएटर सीज किए और कई संचालकों को नोटिस थमाए लेकिन अब विभागीय कार्यवाही के बाद सामने आ रही शिकायतों ने पूरे अभियान पर ही बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है।
सूत्रों की मानें तो स्वास्थ्य विभाग की कार्यवाही के बाद कुछ निजी अस्पताल संचालकों ने कथित तौर पर ताले और सील तोड़कर फिर से अस्पताल तथा ओटी का संचालन शुरू कर दिया है। यदि यह शिकायतें जांच में सही पाई जाती हैं तो यह सिर्फ स्वास्थ्य विभाग के आदेश की अवहेलना नहीं, बल्कि उन मरीजों की सुरक्षा के साथ भी गंभीर खिलवाड़ होगा, जो इलाज की उम्मीद में इन अस्पतालों का रुख करते हैं।
कार्यवाही का खौफ खत्म या 'सेटिंग' का भरोसा -
स्वास्थ्य विभाग ने जिन अस्पतालों को बंद कराया, उनकी ओटी सीज की और संचालकों को नोटिस जारी किए, यदि उन्हीं में दोबारा मरीजों का इलाज और ऑपरेशन शुरू हो गया है तो सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर इन संचालकों को किसका भरोसा है? क्या उन्हें विभागीय कार्यवाही का डर नहीं है? क्या उन्हें लगता है कि कुछ दिनों बाद मामला ठंडा पड़ जाएगा? या फिर कार्यवाही के बाद निगरानी व्यवस्था कमजोर पड़ते ही वे दोबारा सक्रिय हो जाते हैं? या पूर्व की व्यवस्था के अनुसार बेखौफ हॉस्पिटल संचालकों ने सेटिंग के भरोसे ताला तोड़कर दुबारा हॉस्पिटल और ओटी का संचालन शुरू के दिया। इन सवालों का जवाब तो अब जांच के बाद ही सामने आ पाएगा, लेकिन इतना जरूर है कि सील किए गए अस्पताल का दोबारा संचालन स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन को अस्पताल माफियाओं की खुली चुनौती है।
मौतों के बाद जागा विभाग, अब बंद अस्पतालों की निगरानी भी चुनौती -
जिले में निजी अस्पतालों में प्रसव और सर्जरी के दौरान मरीजों की मौत के मामलों ने स्वास्थ्य व्यवस्था को कटघरे में खड़ा किया है। कई मामलों में चिकित्सकीय लापरवाही, मानकों की अनदेखी और ऑपरेशन थिएटर में आवश्यक विशेषज्ञों की उपलब्धता को लेकर सवाल उठते रहे हैं। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग ने अभियान चलाकर कई अस्पतालों के खिलाफ कार्यवाही की लेकिन सिर्फ ताला जड़ देना पर्याप्त नहीं है। यदि सील किए गए अस्पताल फिर से खुल जाते हैं तो कार्यवाही का उद्देश्य ही कमजोर पड़ जाएगा।