Sonbhadra News : निजी अस्पतालों का 'डिलीवरी सिंडिकेट' तोड़ने की सीएमओ की अनूठी पहल, तीन सीएचसी में शुरू कराई सर्जरी से प्रसव की सुविधा
sonbhadra
6:40 AM, Aug 11, 2026
प्रसव के नाम पर निजी अस्पतालों में होने वाली मनमानी, भारी-भरकम बिल और सर्जरी के दौरान लापरवाही से होने वाली प्रसूताओं की मौतों के बीच सोनभद्र के मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ0 रमेश कुमार मिश्रा ने..........


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आनन्द कुमार चौबे (संवाददाता)
सोनभद्र । प्रसव के नाम पर निजी अस्पतालों में होने वाली मनमानी, भारी-भरकम बिल और सर्जरी के दौरान लापरवाही से होने वाली प्रसूताओं की मौतों के बीच सोनभद्र के मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ0 रमेश कुमार मिश्रा ने स्वास्थ्य व्यवस्था में बड़ा बदलाव करने की दिशा में कदम बढ़ाया है। अब प्रसूताओं को सर्जरी से डिलीवरी के लिए निजी अस्पतालों की महंगी व्यवस्था पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। जिले के तीन सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों म्योरपुर, चोपन और घोरावल में सरकारी स्तर पर सर्जरी से प्रसव की सुविधा शुरू की जा रही है। खास बात यह है कि यह पहल केवल घोषणा तक सीमित नहीं है, बल्कि म्योरपुर में तीन और चोपन में दो सर्जरी सफलतापूर्वक कराई जा चुकी हैं।
सीएमओ की इस पहल को जिले के ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है। अब तक सर्जरी से प्रसव की जरूरत पड़ने पर परिवारों को निजी अस्पतालों का सहारा लेना पड़ता था। इलाज के बढ़ते खर्च ने कई परिवारों को कर्ज लेने, गहने गिरवी रखने और यहां तक कि जमीन अथवा मकान बेचने तक को मजबूर किया है। सरकारी सीएचसी में सर्जरी की सुविधा मिलने से ऐसे परिवारों को न केवल आर्थिक राहत मिलेगी, बल्कि प्रसूताओं को उनके नजदीक ही सुरक्षित चिकित्सा सुविधा भी उपलब्ध हो सकेगी।
दलालों और 'सिंडिकेट' पर भी लगेगा अंकुश -
तीन सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में सर्जरी से प्रसव की सुविधा शुरू होने का असर केवल मरीजों को मिलने वाली स्वास्थ्य सुविधाओं तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसका सीधा असर उन दलालों और बिचौलियों के नेटवर्क पर भी पड़ने की उम्मीद है, जो दूरदराज के गांवों से आने वाले मरीजों और उनके परिजनों को बेहतर इलाज का सब्जबाग दिखाकर निजी अस्पतालों तक पहुंचाने का काम करते हैं। ग्रामीण इलाकों में सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर सर्जरी की सुविधा उपलब्ध न होने का फायदा उठाकर ऐसे लोग मरीजों और उनके परिजनों को निजी अस्पतालों की ओर ले जाते रहे हैं। कई बार मरीजों के साथ आने वाले तीमारदारों को इलाज की गंभीरता और खर्च की वास्तविक स्थिति बताए बिना निजी अस्पतालों में भर्ती करा दिया जाता है। इसमें आशाओं की भूमिका को लेकर भी समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं। अब जब म्योरपुर, चोपन और घोरावल जैसे क्षेत्रों में सरकारी स्तर पर सर्जरी से प्रसव की सुविधा उपलब्ध होगी तो मरीजों को निजी अस्पताल तक पहुंचाने वाले इस नेटवर्क की पकड़ कमजोर होने की उम्मीद है।