Sonbhadra News : पीएम स्वनिधि योजना में लापरवाही पर डीएम सख्त, खराब प्रगति वाले निकायों से जवाब तलब
sonbhadra
10:45 PM, May 7, 2026
प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना की धीमी प्रगति को लेकर जिलाधिकारी चर्चित गौड़ ने बुधवार को कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित समीक्षा बैठक में बैंक अधिकारियों और नगर निकायों के अधिशासी अधिकारियों की जमकर........


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आनन्द कुमार चौबे (संवाददाता)
• अनपरा, ओबरा, रेणुकूट और रॉबर्ट्सगंज की प्रगति पर जताई नाराजगी
• डीएम बोले - एक हफ्ते में बढ़ाएं आवेदन और ऋण वितरण, नहीं तो होगी कार्रवाई
सोनभद्र । प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना की धीमी प्रगति को लेकर जिलाधिकारी चर्चित गौड़ ने बुधवार को कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित समीक्षा बैठक में बैंक अधिकारियों और नगर निकायों के अधिशासी अधिकारियों की जमकर क्लास लगाई। खराब प्रदर्शन पर नाराजगी जताते हुए डीएम ने संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध स्पष्टीकरण जारी करने के निर्देश दिए और साफ चेतावनी दी कि लापरवाही अब बिल्कुल बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
बैठक में मुख्य विकास अधिकारी जागृति अवस्थी, अग्रणी जिला प्रबंधक इंडियन बैंक, सभी अधिशासी अधिकारी एवं बैंक समन्वयक मौजूद रहे। समीक्षा के दौरान डीएम ने प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना के तहत स्ट्रीट वेंडर्स को दिए जा रहे ऋण वितरण एवं लंबित आवेदनों की प्रगति की विस्तृत जानकारी ली।
समीक्षा में नगर पंचायत अनपरा, ओबरा, रेणुकूट एवं रॉबर्ट्सगंज की प्रगति बेहद खराब पाए जाने पर जिलाधिकारी ने कड़ी नाराजगी जताई। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि एक सप्ताह के भीतर अधिक से अधिक पात्र स्ट्रीट वेंडर्स के आवेदन सुनिश्चित कर ऋण वितरण की प्रक्रिया तेज की जाए।
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जिलाधिकारी ने बताया कि योजना के अंतर्गत स्ट्रीट वेंडर्स को प्रथम किस्त में 15 हजार रुपये, द्वितीय किस्त में 25 हजार रुपये तथा तृतीय किस्त में 50 हजार रुपये तक का ऋण उपलब्ध कराया जाता है, जिससे छोटे कारोबारियों को आर्थिक मजबूती मिल सके।
डीएम ने कहा कि नगर क्षेत्रों के विस्तारित इलाकों में संचालित सभी रेहड़ी-पटरी व्यवसायियों को योजना से जोड़ना प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने बैंक अधिकारियों को लंबित आवेदनों पर तत्काल निर्णय लेने और अनावश्यक देरी समाप्त करने के निर्देश दिए।
जिलाधिकारी चर्चित गौड़ ने कहा कि प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी जनकल्याणकारी योजना है, जिसकी मॉनिटरिंग सीधे सीएम डैशबोर्ड के माध्यम से की जाती है। जिले की रैंकिंग आवेदन और ऋण वितरण की प्रगति पर आधारित होती है। ऐसे में किसी भी स्तर पर शिथिलता पाए जाने पर कठोर कार्रवाई तय है।