Sonbhadra News : क्या मरना ही है स्वास्थ्य विभाग को जगाने का 'अलार्म', 24 घंटे में दो मौतों से निजी अस्पतालों की निगरानी पर उठे सवाल
sonbhadra
7:16 PM, Sep 5, 2026
निजी अस्पतालों की निगरानी के लिए नोडल अधिकारी तैनात हैं, क्षेत्रवार एमओआईसी को पंजीकृत अस्पतालों से लेकर अवैध रूप से संचालित अस्पतालों तक की जांच की जिम्मेदारी सौंपी गई है। कागजों पर निगरानी का.......


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आनन्द कुमार चौबे (संवाददाता)
• डीएम ने दो अलग-अलग निजी हॉस्पिटलों में 24 घंटे में हुई ढ़ाई वर्षीय बच्ची और प्रसूता महिला की मौतों का लिया संज्ञान
• जांच टीम ने नेशनल हॉस्पिटल में सील किए अहम अभिलेख
सोनभद्र । निजी अस्पतालों की निगरानी के लिए नोडल अधिकारी तैनात हैं, क्षेत्रवार एमओआईसी को पंजीकृत अस्पतालों से लेकर अवैध रूप से संचालित अस्पतालों तक की जांच की जिम्मेदारी सौंपी गई है। कागजों पर निगरानी का पूरा तंत्र मौजूद है, लेकिन जमीन पर तस्वीर कुछ और ही नजर आती है। निजी अस्पतालों में मरीजों की मौत हो जाती है, पर स्वास्थ्य विभाग की नींद नहीं टूटती। मामला सुर्खियों में आता है तो अचानक अफसर अस्पताल पहुंचते हैं, रिकॉर्ड सील होते हैं और बयान दर्ज किए जाते हैं। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यहीं है कि क्या स्वास्थ्य विभाग को जगाने के लिए यहां मरना जरूरी है?
महिला और बच्ची की मौत के दो मामलों ने जिले की निजी स्वास्थ्य व्यवस्था के साथ-साथ स्वास्थ्य विभाग की निगरानी प्रणाली को भी कठघरे में खड़ा कर दिया है। परिजनों द्वारा उपचार में लापरवाही के आरोप लगाए गए हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी चर्चित गौड़ ने दोनों प्रकरणों का संज्ञान लेते हुए अपर जिलाधिकारी (न्यायिक) और मुख्य चिकित्साधिकारी की दो सदस्यीय जांच समिति गठित कर दी है। समिति को दो दिन के भीतर स्पष्ट रिपोर्ट देने के निर्देश दिए गए हैं।
मौत हुई तो खुली फाइल, उससे पहले कहाँ था विभाग -
जांच टीम शनिवार को घोरावल स्थित नेशनल हॉस्पिटल, धर्मशाला रोड पहुंची। अधिकारियों ने बच्ची की मौत से जुड़े प्रकरण की मौके पर जांच शुरू की। अस्पताल के उपचार संबंधी अभिलेख और दस्तावेज खंगाले गए। महत्वपूर्ण रिकॉर्ड को सुरक्षित रखने के लिए रिकॉर्ड रूम सील कर दिया गया। संबंधित चिकित्सक का बयान भी दर्ज किया गया लेकिन इस कार्यवाही के साथ एक बड़ा सवाल भी खड़ा हो गया है कि यदि स्वास्थ्य विभाग की निगरानी व्यवस्था लगातार सक्रिय थी तो अस्पताल के रिकॉर्ड की जांच मौत के बाद क्यों करनी पड़ी? अस्पताल में इलाज की व्यवस्था, चिकित्सकीय दस्तावेज, मानक और अन्य जरूरी व्यवस्थाएं नियमित निरीक्षण में पहले क्यों नहीं परखी गईं? बताते चलें कि पूर्व में एक बच्चे के मौत के मामले हो तत्कालीन नेशनल बाल चिकित्सालय पर स्वास्थ्य विभाग का चाबुक चला था लेकिन राजनीतिक रसूख और स्वास्थ्य विभाग की लचर कार्य प्रणाली के चलते एक बार हॉस्पिटल को नए नाम नेशनल हॉस्पिटल के नाम से संचालन का लाइसेंस जारी कर दिया गया।