Sonbhadra News : डॉक्टर की अनुपस्थिति पड़ेगी भारी, तीन बार गायब मिलने पर होगा पंजीकरण निरस्त
sonbhadra
11:41 PM, Apr 21, 2026
जिले में निजी अस्पतालों और क्लीनिकों की मनमानी पर लगाम कसने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने सख्त रुख अपना लिया है। नए नियमों के तहत पंजीकरण और नवीनीकरण को अनिवार्य करते हुए अब लापरवाही या अनियमितता बरतने...


Share:
आनन्द कुमार चौबे (संवाददाता)
सोनभद्र । जिले में निजी अस्पतालों और क्लीनिकों की मनमानी पर लगाम कसने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने सख्त रुख अपना लिया है। नए नियमों के तहत पंजीकरण और नवीनीकरण को अनिवार्य करते हुए अब लापरवाही या अनियमितता बरतने वाले संस्थानों पर कार्रवाई तय मानी जा रही है।
मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ0 पंकज कुमार राय की अध्यक्षता में मंगलवार को सीएमओ सभागार में निजी अस्पतालों, क्लीनिकों और पैथोलॉजी केंद्रों के पंजीकरण एवं नवीनीकरण को लेकर अहम बैठक आयोजित की गई। बैठक में 70 संचालकों को बुलाया गया था, लेकिन केवल 35 की उपस्थिति पर सीएमओ ने कड़ी नाराजगी जताते हुए अनुपस्थित संचालकों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया।
सीएमओ ने बताया कि जिले में संचालित 110 निजी अस्पतालों और क्लीनिकों में से अब तक सिर्फ 48 ने ही नए मानकों के तहत पांच वर्ष के लिए पंजीकरण कराया है। शेष संस्थानों को 30 अप्रैल तक हर हाल में नवीनीकरण कराने का निर्देश दिया गया है। उन्होंने चेतावनी दी कि तय समय सीमा के बाद बिना रिन्यूअल चलने वाले अस्पतालों का पंजीकरण निरस्त कर दिया जाएगा और उनके खिलाफ विधिक कार्रवाई भी की जाएगी।
नए नियमों के तहत सभी पंजीकृत संस्थानों को पीले रंग का सूचना बोर्ड लगाना अनिवार्य होगा, जिसमें डॉक्टर का नाम, मोबाइल नंबर, ओपीडी समय और पैरामेडिकल स्टाफ का विवरण अंकित रहेगा।
एसीएमओ व पंजीयन नोडल अधिकारी डॉ0 गुलाब शंकर यादव ने स्पष्ट किया कि एमबीबीएस डॉक्टर के नाम पर केवल क्लीनिक का संचालन ही मान्य होगा, वहां सर्जरी की अनुमति नहीं होगी। जिस डॉक्टर के नाम से अस्पताल पंजीकृत होगा, वही सर्जरी करेगा और सर्जरी के दौरान एनेस्थीसिया विशेषज्ञ की उपस्थिति अनिवार्य होगी। नियमों का उल्लंघन करने पर संबंधित अस्पताल के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
विज्ञापन
उन्होंने यह भी बताया कि कुछ अस्पताल ऐसे मरीजों को भी भर्ती कर लेते हैं, जिनके इलाज के लिए जिले में विशेषज्ञ डॉक्टर उपलब्ध नहीं हैं। ऐसे मामलों पर विशेष निगरानी रखी जाएगी। साथ ही सभी अस्पतालों और पैथोलॉजी केंद्रों के लिए अग्निशमन विभाग और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की एनओसी लेना अनिवार्य कर दिया गया है। बिना एनओसी संचालन करने वालों पर भी कार्रवाई होगी।