Sonbhadra News : फाइलों में अस्पताल 'फिट', जाँच में अधूरे इंतजाम, निजी हॉस्पिटलों के नवीनीकरण और पंजीकरण पर उठे सवाल
sonbhadra
7:47 AM, Aug 13, 2026
आदिवासी बाहुल्य जनपद सोनभद्र में निजी अस्पतालों के पंजीकरण का आंकड़ा जितना चौंकाने वाला है, उससे कहीं ज्यादा चौंकाने वाला है पंजीकरण की प्रक्रिया को लेकर उठ रही चर्चाओं का सच। जिले में करीब 88 निजी...


AI जनरेटेड बैनर.............
Share:
आनन्द कुमार चौबे (संवाददाता)
सोनभद्र । आदिवासी बाहुल्य जनपद सोनभद्र में निजी अस्पतालों के पंजीकरण का आंकड़ा जितना चौंकाने वाला है, उससे कहीं ज्यादा चौंकाने वाला है पंजीकरण की प्रक्रिया को लेकर उठ रही चर्चाओं का सच। जिले में करीब 88 निजी अस्पतालों का पंजीकरण होने की बात सामने आ रही है, जबकि दूसरी ओर जिले में विशेषज्ञ डॉक्टर, सर्जन और एनेस्थेटिस्ट की संख्या गिनी-चुनी है। ऐसे में सवाल यह नहीं कि इतने अस्पताल खुले कैसे, बल्कि इतने अस्पतालों को जरूरी चिकित्सकीय मानक आखिर पूरे कैसे मिले?
वहीं जमीनी स्तर पर उठ रही चर्चाओं में यह तक कहा जा रहा है कि निजी अस्पतालों को 'डॉक्टर लाओ, पंजीकरण पाओ' की तर्ज पर लाइसेंस देने की व्यवस्था चल रही है। पंजीकरण के लिए ‘सेटिंग-गेटिंग’ की चर्चाएं यदि निराधार हैं तो स्वास्थ्य विभाग को पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाकर इन आशंकाओं पर विराम लगाना चाहिए लेकिन यदि पंजीकरण के बाद होने वाली जांचों में बार-बार वहीं डॉक्टर, वहीं संसाधन और वहीं मानक गायब मिल रहे हैं, जिनके आधार पर अस्पताल को लाइसेंस मिला था, तो फिर पूरी प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच जरूरी हो जाती है।
लाइसेंस इलाज का या मौत का अस्पताल चलाने की इजाजत -
निजी अस्पताल को पंजीकरण देना महज एक प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं है बल्कि यह इस बात का प्रमाण भी माना जाता है कि संबंधित संस्थान निर्धारित चिकित्सकीय मानकों के अनुरूप मरीजों को उपचार देने की स्थिति में है। ऐसे में यदि पंजीकरण हासिल करने के बाद अस्पतालों में डॉक्टर नहीं मिलते, आवश्यक विशेषज्ञ उपलब्ध नहीं होते, संसाधन अधूरे मिलते हैं या सर्जरी जैसी गंभीर प्रक्रिया में जरूरी विशेषज्ञ व्यवस्था पर सवाल खड़े होते हैं तो स्वास्थ्य विभाग की जीकरण व्यवस्था की विश्वसनीयता पर भी प्रश्न चिन्ह लगता है।
जिले के निजी अस्पतालों में इलाज के दौरान मरीजों की मौत की घटनाएं आए दिन सामने आती हैं, जिससे ना सिर्फ एक व्यक्ति बल्कि एक पूरा परिवार प्रभावित होता है। ऐसे में क्या स्वास्थ्य विभाग सिर्फ लाइसेंस जारी करने तक अपनी जिम्मेदारी मान रहा है, या मरीजों की सुरक्षा की जिम्मेदारी भी उतनी ही गंभीरता से निभाई जा रही है? क्योंकि यदि किसी अस्पताल को विभाग ने जांच के बाद पंजीकरण दिया और उसी अस्पताल में बाद में गंभीर अनियमितताएं मिलीं, तो कहीं न कहीं उस पूरी प्रक्रिया की जवाबदेही स्वास्थ्य विभाग तक भी पहुंचती है।
जिले में गिने-चुने विशेषज्ञ, फिर 88 अस्पतालों का पंजीकरण कैसे -