Sonbhadra News : तहसील प्रशासन की मिलीभगत से हो गया करोड़ों की जमीन का खेला, भाजपा नेता ने खोली भ्रष्टाचार की परतें, डीएम से की उच्चस्तरीय जांच की मांग
sonbhadra
12:47 AM, May 8, 2026
जनपद सोनभद्र में लंबे समय से तहसील प्रशासन, लेखपालों और भू-माफियाओं की कथित मिलीभगत से जमीनों का बड़ा खेल खेले जाने के आरोप अब खुलकर सामने आने लगे हैं। किसानों की जमीनों से लेकर सरकारी भूमि, नदी......


भाजपा पूर्व जिलाध्यक्ष डॉ0 धर्मवीर तिवारी...
Share:
आनन्द कुमार चौबे (संवाददाता)
• तहसील प्रशासन, लेखपाल और भू-माफियाओं की मिलीभगत से करोड़ों की जमीनों का खेल होने का आरोप
• बांध की जमीन से लेकर नदी तक पर कब्जे के आरोप, अवैध प्लाटिंग और फर्जी पट्टा आवंटन पर उठा बड़ा सवाल
सोनभद्र । जनपद सोनभद्र में लंबे समय से तहसील प्रशासन, लेखपालों और भू-माफियाओं की कथित मिलीभगत से जमीनों का बड़ा खेल खेले जाने के आरोप अब खुलकर सामने आने लगे हैं। किसानों की जमीनों से लेकर सरकारी भूमि, नदी और बांध की जमीन तक पर कब्जे और अवैध प्लाटिंग के आरोपों ने राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
गुरुवार को भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष डॉ0 धर्मवीर तिवारी ने जिलाधिकारी को शिकायती पत्र सौंपकर रॉबर्ट्सगंज तहसील में करोड़ों रुपये के जमीन घोटाले, अवैध पट्टा आवंटन और राजस्व कर्मियों की भूमिका की उच्चस्तरीय जांच की मांग कर सनसनी फैला दी। डीएम को दिए गए शिकायती पत्र में उन्होंने आरोप लगाया कि तहसीलदार, कानूनगो और लेखपाल की मिलीभगत से विवादित एवं सरकारी जमीनों को बिल्डरों के माध्यम से अवैध रूप से प्लाटिंग कराकर बेचा जा रहा है। आरोप है कि सुविधा शुल्क लेकर जमीनों की रजिस्ट्री और पट्टा आवंटन कराए गए, जबकि पात्र लोगों को योजनाओं से दूर रखा गया।
पूर्व भाजपा जिलाध्यक्ष ने आरोप लगाया कि ग्राम लसड़ा और अक्छोर में बांध की बहुमूल्य जमीन अपात्र लोगों को पट्टे पर दे दी गई। शिकायत में कहा गया कि रॉबर्ट्सगंज-पन्नूगंज फोरलेन निर्माण की संभावनाओं को देखते हुए सड़क किनारे करोड़ों रुपये की जमीनों को भविष्य में भारी मुनाफा कमाने की नीयत से कब्जाने और पट्टे पर देने का खेल खेला गया।
विज्ञापन
इतना ही नहीं, अक्छोर ग्राम पंचायत से होकर बहने वाली पुरानी सिरोही नदी तक को नहीं छोड़ा गया। आरोप है कि भू-माफियाओं ने नदी को पाटकर उस पर बाउंड्रीवाल और मकान खड़े कर दिए, जबकि प्रशासन मौन बना रहा। शिकायत में इसे पर्यावरण और सरकारी संपत्ति दोनों के लिए गंभीर खतरा बताया गया है।
शिकायती पत्र में यह भी दावा किया गया है कि तहसील प्रशासन की मिलीभगत से अवैध प्लाटिंग का पूरा नेटवर्क संचालित हो रहा है और इसके जरिए बड़ी मात्रा में अवैध संपत्ति अर्जित की गई है। आरोप यह भी है कि धन के लेन-देन के लिए तहसील के एक कर्मचारी के बैंक खाते का इस्तेमाल किया गया।