Sonbhadra News : नशा मुक्ति संकल्प यात्रा का शंखनाद, मशाल जुलूस से गूंजा सोनभद्र
sonbhadra
5:49 PM, Oct 14, 2026
विशेष रूप से माताओं और बहनों की भागीदारी अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि परिवार को नशे की बुराई से बचाने और समाज में जागरूकता फैलाने में उनकी अहम भूमिका है।


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शांतनु कुमार
सोनभद्र। नशामुक्त समाज के निर्माण और युवाओं को नशे के दुष्परिणामों के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से आयोजित नशा मुक्ति संकल्प यात्रा के तहत आज निर्धारित गांवों में जनसंपर्क एवं जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए। यात्रा मडरा, बिसुंधरी, सेंधुरी, रैपुरा, बराक, बरौली और सोनवट होते हुए बिछिया गांव पहुंची, जहां आज के कार्यक्रम का समापन हुआ। यात्रा के दौरान मशाल जुलूस निकालकर ग्रामीणों को नशे से दूर रहने, परिवारों को सुरक्षित रखने और समाज में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए प्रेरित किया गया। इस अभियान में सैकड़ों ग्रामीणों ने सहभागिता की।
कार्यक्रम का शुभारंभ स्वामी विवेकानंद जी के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। मुख्य अतिथि जिला समाज कल्याण अधिकारी ज्ञानेंद्र सिंह भदौरिया ने मशाल प्रज्वलित कर देश के जाने-माने हास्य कलाकार एवं अभियान का नेतृत्व कर रहे अभय कुमार शर्मा को सौंपी। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि नशामुक्त समाज के निर्माण के लिए प्रत्येक व्यक्ति को इस अभियान का हिस्सा बनना चाहिए। विशेष रूप से माताओं और बहनों की भागीदारी अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि परिवार को नशे की बुराई से बचाने और समाज में जागरूकता फैलाने में उनकी अहम भूमिका है।
अभियान का नेतृत्व कर रहे अभय कुमार शर्मा ने सोनभद्र में नशे की समस्या के सामाजिक और भौगोलिक पहलुओं पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि सोनभद्र चार राज्यों की सीमाओं से जुड़ा जिला है। ऐसे भौगोलिक कारणों से यह नशीले पदार्थों की आपूर्ति के लिहाज से संवेदनशील क्षेत्र बन सकता है। युवाओं में अशिक्षा और जागरूकता की कमी का लाभ उठाकर नशे के कारोबार से जुड़े लोग उन्हें आसानी से अपना शिकार बना लेते हैं। इसका दुष्परिणाम केवल युवा तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरे परिवार को भुगतना पड़ता है और अनेक परिवार बर्बादी की कगार पर पहुंच जाते हैं।
उन्होंने आगामी चुनावों के संदर्भ में लोगों को सचेत करते हुए कहा कि चुनाव के समय कुछ लोग शराब, नशीले पदार्थों या अन्य प्रलोभनों के माध्यम से मतदाताओं को प्रभावित करने का प्रयास कर सकते हैं। ऐसे प्रलोभनों से बचना और अपने विवेक से निर्णय लेना जरूरी है। उन्होंने कहा कि समाज के सामने एक महत्वपूर्ण चुनाव नशा अपनाने और नशे से दूर रहने के बीच भी है। हमें नशामुक्त जीवन और स्वस्थ भविष्य का चुनाव करना चाहिए। त्योहारों और सामाजिक अवसरों पर पहले लोग एक-दूसरे के साथ मिलकर खुशियां बांटते थे, लेकिन नशे की बढ़ती प्रवृत्ति के कारण कई लोग घरों में ही नशा करके पड़े रहते हैं। इससे सामाजिक मेलजोल और भाईचारा कमजोर पड़ता है। परिवारों में तनाव, घरेलू हिंसा और महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार जैसी समस्याएं भी बढ़ सकती हैं।
अभय कुमार शर्मा ने आर्थिक नुकसान और स्वास्थ्य पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों को समझाते हुए कहा कि शराब और नशे पर खर्च होने वाला पैसा परिवार की खुशहाली छीन सकता है। यदि यही पैसा बच्चों की किताबों, शिक्षा और बेहतर भविष्य पर खर्च किया जाए, तो वही बच्चे आगे चलकर डॉक्टर, वैज्ञानिक और समाज के जिम्मेदार नागरिक बन सकते हैं। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि शराब और तंबाकू जैसे हानिकारक पदार्थों का सेवन कैंसर सहित गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ा सकता है, जबकि बच्चों की शिक्षा में किया गया निवेश उन्हें भविष्य में कैंसर जैसी घातक बीमारियों के उपचार और मानव सेवा के योग्य बना सकता है। उन्होंने युवाओं और अभिभावकों से नशे से दूर रहने तथा शिक्षा और संस्कारों को प्राथमिकता देने की अपील की।