Sonbhadra News : दो मौतें, अनगिनत सवाल! क्या अवैध अस्पतालों पर शिकंजा कस पाएंगे नवागत सीएमओ?
sonbhadra
8:39 PM, Jun 6, 2026
जिले के नए मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ0 रमेश कुमार मिश्रा ने ऐसे समय में कमान संभाली है, जब स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली लगातार सवालों के घेरे में है। अवैध अस्पतालों, झोलाछाप डॉक्टरों और बिना मानक...


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आनन्द कुमार चौबे (संवाददाता)
सोनभद्र । जिले के नए मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ0 रमेश कुमार मिश्रा ने ऐसे समय में कमान संभाली है, जब स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली लगातार सवालों के घेरे में है। अवैध अस्पतालों, झोलाछाप डॉक्टरों और बिना मानक संचालित हो रहे निजी चिकित्सा केंद्रों ने पूरे जिले में स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है। ऐसे में नवागत मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. रमेश कुमार मिश्रा के सामने सबसे बड़ी चुनौती सिर्फ सरकारी अस्पतालों की व्यवस्था सुधारना नहीं, बल्कि उन "मौत की दुकानों" के नेटवर्क को ध्वस्त करना भी है, जो वर्षों से लोगों की जिंदगी से खिलवाड़ कर रहे हैं।
ऐसे में बड़ा सवाल यह है कि आखिर स्वास्थ्य विभाग की नाक के नीचे चल रहे इन अस्पतालों को संरक्षण कौन दे रहा था? यदि विभाग नियमित निरीक्षण कर रहा था तो फिर कोन और सुकृत क्षेत्र में अवैध अस्पतालों में महिलाओं की मौत कैसे हो गई? और यदि निरीक्षण नहीं हो रहा था तो यह विभागीय लापरवाही का सबसे बड़ा उदाहरण नहीं तो क्या है?
जिले में ऐसे कई अस्पताल, नर्सिंग होम और क्लीनिक संचालित होने की चर्चा आम है, जहां न तो विशेषज्ञ डॉक्टर हैं और न ही आवश्यक संसाधन। इसके बावजूद मरीजों का इलाज और ऑपरेशन तक किए जा रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि स्वास्थ्य विभाग की टीमों को इन संस्थानों की जानकारी होने के बावजूद अक्सर कार्रवाई केवल शिकायत या हादसे के बाद ही होती है।
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गत दिनों कोन क्षेत्र में ऑपरेशन टेबल पर प्रसूता की मौत और सुकृत क्षेत्र में उपचार के दौरान महिला की जान जाने की घटनाओं ने यह साबित कर दिया कि जिले में कई निजी अस्पताल स्वास्थ्य सेवाएं नहीं, बल्कि मौत की दुकान चला रहे हैं। हैरत की बात यह है कि हादसों के बाद छापेमारी, सीलिंग और कार्रवाई की खबरें तो सामने आती हैं, लेकिन कुछ दिनों बाद मामला ठंडे बस्ते में चला जाता है और कुछ समय बाद वही संस्थान नए नाम या नए तरीके से फिर संचालन शुरू कर देते हैं। ऐसे में विभाग की निगरानी व्यवस्था और जवाबदेही दोनों पर सवाल खड़े होते हैं।
"नवागत सीएमओ डॉ0 रमेश कुमार मिश्रा के सामने अब यह परीक्षा होगी कि वे स्वास्थ्य विभाग की छवि को कैसे सुधारते हैं। क्या वे अवैध अस्पतालों के खिलाफ नियमित और निष्पक्ष अभियान चलाकर जिम्मेदार लोगों को कानून के दायरे में लाएंगे, या फिर पूर्व की तरह कार्रवाई केवल कागजों तक सीमित रह जाएगी? ऐसे में जनता की निगाहें अब नए सीएमओ पर टिकी हैं। लोग यह देखना चाहते हैं कि क्या स्वास्थ्य विभाग वास्तव में मरीजों की सुरक्षा और बेहतर चिकित्सा व्यवस्था को प्राथमिकता देगा या फिर अवैध अस्पतालों का नेटवर्क पहले की तरह ही चलता रहेगा क्योंकि जब तक नियमों को ताक पर रखकर चल रहे अस्पतालों पर कठोर कार्रवाई नहीं होगी, तब तक किसी भी नई मौत के लिए सिर्फ अस्पताल ही नहीं, बल्कि निगरानी तंत्र भी सवालों के घेरे में रहेगा।"